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ChatGPT पर अब भारतीय ब्रांड के विज्ञापन, Razorpay बना OpenAI का पार्टनर

अब भारतीय कंपनियाँ ChatGPT की बातचीत के अंदर विज्ञापन दिखा सकेंगी, और कैटलॉग से लेकर कैंपेन तक का काम Razorpay Engage संभालेगा।

लेखक: सही पढ़ाई न्यूज़4 मिनटRead in English

पहले खरीदारी एक सर्च बॉक्स से शुरू होती थी और लिंक की एक लंबी लिस्ट मिलती थी। अब यह शुरुआत एक बातचीत से होने लगी है। 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु की पेमेंट कंपनी रेज़रपे (Razorpay) ने बताया कि उसने OpenAI के साथ साझेदारी की है, जिससे भारतीय ब्रांड ChatGPT के अंदर विज्ञापन दिखा पाएंगे — और इन कैंपेन को चलाने का काम रेज़रपे करेगा।

मुख्य बातें
  • रेज़रपे भारत में ChatGPT Ads का पार्टनर बन गया है; कंपनी ने यह अपने ब्लॉग पर 5 अक्टूबर 2026 को बताया।
  • यह काम Razorpay Engage के ज़रिये होगा, जो कंपनी का ग्रोथ मार्केटिंग प्लैटफ़ॉर्म है। यह ब्रांड का प्रोडक्ट कैटलॉग तैयार करता है, कैंपेन चालू करता है और नतीजों की रिपोर्ट देता है।
  • कैंपेन बनाने और उनमें बदलाव करने का काम एक AI एजेंट करेगा, जिस पर रेज़रपे की अपनी टीम निगरानी (human oversight) रखेगी।
  • पहली लहर के ब्रांड पहले से जुड़ चुके हैं। रेज़रपे ने नाम बताए हैं: तनिष्क (Tanishq), टाइटन (Titan), Palmonas, Traya, Innovist, टाटा न्यू (Tata Neu) और Axis Max Life।
  • रेज़रपे का तर्क है कि नया ग्राहक जोड़ना महँगा होता जा रहा है, और लोग सर्च बॉक्स छोड़कर सीधे AI असिस्टेंट से सवाल पूछने लगे हैं।

रेज़रपे ने असल में क्या ऐलान किया है?

रेज़रपे ने 5 अक्टूबर 2026 को कहा कि वह OpenAI के साथ मिलकर भारतीय कारोबारियों को ChatGPT पर विज्ञापन देने की सुविधा देगा, और यह काम उसके ग्रोथ मार्केटिंग प्लैटफ़ॉर्म Razorpay Engage के ज़रिये होगा। इसका सीधा मतलब है कि किसी ब्रांड को शुरू से कोई नया विज्ञापन सिस्टम सीखने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। Engage तीन मुश्किल काम अपने ऊपर ले लेता है: प्रोडक्ट की जानकारी को ऐसे रूप में ढालना जिसे एक बातचीत करने वाला AI इस्तेमाल कर सके, कैंपेन चालू करना, और यह नापना कि उससे क्या मिला।

रेज़रपे इसे ग्राहक तक पहुँचने की एक नई जगह बताता है, और वह भी ऐसे समय में जब पुरानी जगहें महँगी पड़ रही हैं। कंपनी की पोस्ट दो बातें कहती है: एक नया ग्राहक जोड़ने की लागत लगातार बढ़ रही है, और अब ज़्यादा लोग अपना सवाल सर्च इंजन में टाइप करने की जगह किसी AI असिस्टेंट से पूछ रहे हैं।

कौन-कौन से ब्रांड पहले से विज्ञापन दे रहे हैं?

रेज़रपे ने अपनी पोस्ट में सात नाम गिनाए हैं: तनिष्क, टाइटन, Palmonas, Traya, Innovist, टाटा न्यू और Axis Max Life। उसी दिन छपी एंट्रैकर (Entrackr) की रिपोर्ट में लिस्ट थोड़ी अलग है — उसमें Fastrack, Shaadi.com, Rivaah by Tanishq और नरसी मोंजी इंस्टिट्यूट ऑफ़ मैनेजमेंट स्टडीज़ (NMIMS) के नाम भी हैं। इनमें से कई ब्रांड एक ही पैरेंट कंपनी के हैं, इसलिए दोनों लिस्ट एक-दूसरे को काटती नहीं, बल्कि आपस में मिलती-जुलती हैं।

इसमें AI कितना काम करता है?

रोज़मर्रा का ज़्यादातर काम। रेज़रपे के मुताबिक प्लैटफ़ॉर्म एक AI एजेंट इस्तेमाल करता है, जो कैंपेन बनाता है, उन्हें चलाता है, नतीजों पर नज़र रखता है और ज़रूरत के हिसाब से बदलाव करता है — जबकि कंपनी की टीम इस पर निगरानी रखती है। यह बँटवारा, कि दोहराने वाला काम एजेंट करे और इंसान उसे जाँचे, आज ज़्यादातर कंपनियाँ तब अपनाती हैं जब किसी AI सिस्टम के हाथ में बजट दिया जाता है।

कोई ब्रांड चैट के अंदर दिखने के पैसे क्यों देगा?

वजह है सवाल पूछने का तरीका। सर्च इंजन को दो-चार शब्द दीजिए, वह एक रैंक की हुई लिस्ट लौटा देता है। बातचीत में इंसान अपनी पूरी स्थिति बता सकता है, बदले में कुछ विकल्प पा सकता है, और कई बार सवाल-जवाब करके अपनी पसंद को छाँट सकता है। एंट्रैकर के मुताबिक OpenAI में भारत के एंटरप्राइज़ सेल्स हेड नितिन बवनकुले ने इसे इस तरह कहा: तय विकल्पों की लिस्ट में ढूँढने की जगह अब लोग बता सकते हैं कि उन्हें क्या चाहिए, संभावनाएँ टहल कर देख सकते हैं, और बातचीत में ही अपना फ़ैसला पक्का कर सकते हैं। एंट्रैकर ने रेज़रपे के चीफ़ ऑपरेटिंग ऑफ़िसर राहुल कोठारी के हवाले से भी लिखा है कि इस साझेदारी से कारोबारी ChatGPT Ads को आज़मा सकेंगे, वह भी पहले से खुद पूरी महारत बनाए बिना।

जिन पाठकों को यह जानना है कि अंदर असल में हो क्या रहा है, उनके लिए दो हिस्सों को अलग-अलग समझना ज़रूरी है। ChatGPT एक लैंग्वेज मॉडल है: वह अपना जवाब एक-एक टुकड़े में, अपनी सीखी हुई चीज़ों से बनाता है। लेकिन कोई मॉडल यह नहीं जान सकता कि आज किस चीज़ का क्या दाम है या कोई सामान स्टॉक में है या नहीं। इसीलिए प्रोडक्ट कैटलॉग उसे अलग से देना पड़ता है और बातचीत के वक़्त उसमें से जानकारी निकालनी पड़ती है। जानकारी निकालने के इस कदम को रिट्रीवल (retrieval) कहते हैं, और यही वजह है कि "अपना प्रोडक्ट फ़ीड ठीक से तैयार कीजिए" इस पूरे इंतज़ाम का पहला और सबसे नीरस काम है।

आगे किन बातों पर नज़र रखें

न रेज़रपे ने और न एंट्रैकर ने कोई आँकड़े दिए हैं: न दाम, न विज्ञापन देने वालों की संख्या, न पहुँच। भारत से जुड़े इस इंतज़ाम पर OpenAI की अपनी कोई घोषणा हमें नहीं मिली, इसलिए फ़िलहाल यह खबर रेज़रपे के ब्लॉग और एंट्रैकर की रिपोर्ट पर टिकी है। आगे तीन बातें देखने लायक हैं: एक कैंपेन की लागत कितनी पड़ती है, बातचीत के बीच आए विज्ञापन इतने साफ़ तरीके से चिह्नित होते हैं या नहीं कि पाठक सलाह और विज्ञापन में फ़र्क कर सके, और नयापन उतरने के बाद ये पहले सात ब्रांड टिके रहते हैं या नहीं।